Rajasthan ki pramukh sabhyataye

 राजस्थान की प्रमुख सभ्यताएं

हेलो नमस्कार दोस्तों, हमारी वेबसाइट की आज की न्यू एंड फ्रेश आर्टिकल में आपका बहुत-बहुत स्वागत है आज हम इतिहास से जुड़ी कुछ जानकारी आपके सामने पेश करने जा रहे हैं तो आप हमारे आज की इस पोस्ट में हमारे साथ बने रहिए और इतिहास से संबंधित कुछ जानकारी प्राप्त कीजिए तो चलिए शुरू करते हैं कुछ राजस्थान की प्रमुख घटनाओं में से एक घटना के बारे में आज की इस पोस्ट में हम वर्णन करने वाले हैं।

♦ राजस्थान की प्रमुख सभ्यताएं 

दोस्तों आज हम कुछ महत्वपूर्ण सभ्यताओं के बारे में आज की इस पोस्ट में बताने वाले हैं तो चलिए शुरू करते हैं स्टेप बाय स्टेप 

Step 1 – कालीबंगा सभ्यता –

इस सभ्यता का शाब्दिक अर्थ होता है– “काले रंग की चूड़ियां”

इस सभ्यता की अवधि 2500 से 3000 ईसा पूर्व तक मानी जाती है कालीबंगा सभ्यता की खोज सन 1952 में पुरातत्व वेता अमलानंद घोष ने की थी।

इस सभ्यता पर सर्वप्रथम उत्खनन कार्य सन 1961–62 में बीके थापर (बालकृष्ण) तथा बीवी लाल ने की थी।

  स्वतंत्रता प्राप्त करने के बाद खोजी जाने वाली पहली सभ्यता कालीबंगा सभ्यता है। 

यह सब घग्गर नदी (हनुमानगढ़) के किनारे को दी गई है गंगा नदी को मृत नदी नदी के नाम से भी जाना जाता है 

नदी का उद्गम हिमालय पर्वत माला की शिलालेख (हिमाचल प्रदेश) की पहाड़ियों से होता है बाढ़ आने की स्थिति में इस नदी का पानी पाकिस्तान के पोर्ट अब्बास तक पहुंच जाता है।

कालीबंगा सभ्यता की मुख्य विशेषता सुनिश्चित व्यवस्था है जहां सड़क हमेशा एक दूसरे को समकोण पर काटती है

कालीबंगा सभ्यता की समाज मातृसत्तात्मक है इस सभ्यता की मुख्य विशेषता यह है कि यहां पर घरों के द्वार मुख्य सड़क पर नहीं खुलते हैं।

इस सभ्यता में घरों की नालियां पक्की पाई गई हैं इसमें आभूषण शीप, शंख, पत्थर एवं मिट्टी के बने होते थे।

विश्व की एकमात्र जहां मिश्रित फसल होने के साक्ष्य प्राप्त हुए है।

Step 2 – आहड़ सभ्यता (उदयपुर वल्लभनगर तहसील)

 यह सभ्यता बेड़च या आयड़ नदी के किनारे खोजी गई है उपनाम – ताम्रवती नगरी

क्योंकि यहां पर सर्वाधिक तांबे के औजार प्राप्त हुए हैं।

10 वीं या 11 वीं सदी में इस सभ्यता को आघाटपूरी या आघाटदुर्ग के नाम से जाना जाता था।

स्थानीय लोग इस सभ्यता को धुलकोट के नाम से जानते थे।

इस सभ्यता की खोज सन् 1953 में अक्षय कीर्ति व्यास ने की।

इस सभ्यता का सर्वप्रथम उत्खनन कार्य R.C. अग्रवाल ने किया।

इस सभ्यता में खाद्य पदार्थों को रखने के लिए मृदभांडों का इस्तेमाल करते थे जिन्हें गोरे या कोट कहा जाता था।

Step 3 – गणेश्वर सभ्यता सीकर शेखावाटी नीम का थाना

यह सभ्यता कांतली नदी। के किनारे स्थित है। जो वर्तमान में शुष्क है।

इस सभ्यता से मछली पकड़ने के कांटे प्राप्त हुए है।

ताम्र युगीन सभ्यताओं की जननी गणेश्वर सभ्यता को माना जाता है।

Step 4 –बालाथल सभ्यता (उदयपुर नदी आयड)

इस सभ्यता की खोज 1993 में V.N. मिश्र (वीरेंद्र नाथ मिश्र) के नेतृत्व में पूना विश्वविद्यालय के प्रोफेसरों ने की।

इस सभ्यता में सांड की मिट्टी की बनी हुई मूर्ति प्राप्त हुई है।

Step 5 – बैराठ सभ्यता 

यह सब बता बीजक डूंगरी जयपुर में स्थित है सभ्यता की खोज सन 1936 – 37 में दयाराम साहनी के द्वारा की गई थी।

इस सभ्यता का प्राचीन नाम विराटनगर या विराटपुर था।

इस सभ्यता से मौर्यकालीन बौद्ध मठ एवं बौद्ध मंदिर प्राप्त हुए हैं।

अशोक द्वारा लिखवाया गया भाब्रू शिलालेख इसी स्थान पर खोजा गया है जो वर्तमान में कोलकाता संग्रहालय में स्थित है।

इस सभ्यता से सूती कपड़े के टुकड़े पंचमार्क सिक्के प्राप्त हुए हैं।

Step 6 – रंगमहल सभ्यता 

यह सभ्यता घग्गर नदी के किनारे स्थित है घग्गर नदी का सरस्वती नाम ऋग्वेद के आठवें मंडल के 17 अध्याय में मिलता है।

इस सभ्यता की खोज 1952 – 54 जर्मनी के पुरातत्ववेत्ता डॉक्टर हन्नारिड द्वारा की गई थी।

यह सभ्यता कुषाण कालीन, मौर्यकालीन एवं पूर्व गुप्त कालीन सभ्यता के नाम से भी जानी जाती है।

Step 7 – नोह सभ्यता

भरतपुर आगरा मार्ग पर भरतपुर से 5 किलो मीटर से आ गया सभ्यता स्थित है।

सभ्यता से कुषाण कालीन सिक्के प्राप्त हुए हैं जोता में के बने हैं।

यह सभ्यता पांच सांस्कृतिक युगों से संबंधित है।

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