Rajasthan me British Kaal Ka Uday

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राजस्थान में ब्रिटिश काल का उदय पूरी जानकारी हिन्दी में।

हेलो नमस्कार दोस्तों, आज की इस पोस्ट में हम आपके लिए कुछ ऐसी घटना से रूबरू कराने जा रहे हैं जिनके बारे में सुनकर आपके रोंगटे खड़े हो जाएंगे। जिस समय राजस्थान में ब्रिटिश काल का उदय हुआ था तो आज हम इसी से संबंधित है जानकारी देने वाली है।

राजस्थान में ब्रिटिश काल का उदय –

बूंदी में उत्तराधिकारी संघर्ष –

बूंदी के शासक हाड़ा बुध सिंह जयपुर के सवाई जय सिंह की बहन चंद्रकवर के साथ हुआ था जिनके गर्व से एक पुत्र पैदा हुआ था और उसका नाम भवानी सिंह था जिसे बुध सिंह ने नाजायज कहकर अस्वीकार कर दिया।

इस बात का बदला लेने के लिए सवाई जयसिंह ने 19 मई 1730 को बुध सिंह के राज्य से बाहर जाने पर करवट के जागीरदार सालिम सिंह के पुत्र दलेल सिंह को शासक बना दिया।

→जय सिंह ने अपनी पुत्री कृष्णा कुमारी का विवाह दलेल सिंह के पुत्र के साथ दिया।

→ कछवाहा रानी चंद्र कंवर ने अपने राज्य की सहायता के लिए मराठा सरदार सिंधिया मल्हार राव होलकर को ₹600000 की एवज राशि पर अपने राज्य में बुलाया।

→ 1732 में मराठा बूंदी सेना एवं जयपुर सेना के मध्य युद्ध हुआ जिसमें मराठा सेना विजय हुई।

→ उम्मेद सिंह को शासक बनाया गया 1734 में दलेल सिंह की सेना ने उम्मेद सिंह को पराजित कर दिया।

हुरडा सम्मेलन (भीलवाड़ा) –

इस सम्मेलन का आयोजन 17 जुलाई 1734 को किया गया।

→इस सम्मेलन के पहले अध्यक्ष मेवाड़ महाराणा संग्राम सिंह थे जिनकी मृत्यु जनवरी 1734 को होने के कारण सम्मेलन का अध्यक्ष जगत सिंह द्वितीय को बनाया गया।

→ यह सम्मेलन आपसी लालच के कारण असफल रहा।

जयपुर का उत्तराधिकारी संघर्ष –

मेवाड़ महाराणा अमर सिंह द्वितीय की पुत्री चंद्राकवर का विवाह सवाई जय सिंह के साथ हुआ जिनके गर्व से 1724 को माधों सिंह का जन्म हुआ।

→ सवाई जय सिंह का दूसरा विवाह खींची रानी सूरज कवर के साथ हुआ जिनके गर्भ से ईश्वरी सिंह नामक पुत्र का जन्म हुआ।

→ सवाई जय सिंह का बड़ा पुत्र होने के नाते ईश्वरी सिंह जयपुर का शासक एवं माधव सिंह को रामपुरा जागीर (1729) दे दी गई।

∆ राज महल का युद्ध 1747 – 

यह युद्ध 1 मार्च 1747 को टोंक जिले की देवली तहसील के राजमहल नामक स्थान पर बनास नदी के किनारे हुआ था इस युद्ध में जयपुर की सेना ने कोटा बूंदी और में वाण एवं मराठों की संयुक्त सेना को पराजित किया तथा इसे सेना के उपलक्ष में सर्गासूली या ईसर लाटा बनवाई गई।

बगरू का युद्ध –

आमेर एवं कोटा बूंदी –मेवाड़ एवं मराठों की संयुक्त सेना की मध्य 1747–48 में हुआ।

→ जिसमें मराठा सेना विजय हुई परंतु मराठाओं ने एक निश्चित धनराशि लेकर ईश्वरी सिंह को दोबारा से राजा बना दिया।

तुंगा का युद्ध (जयपुर) –

यह युद्ध आमेर यह मराठों के मध्य हुआ था।

जिसमें मराठा सेना पराजित हुई बिसाऊ सरदार सूरजमल शेखावत शहीद हुए जिनकी 8 खंभों की छतरी दूंगा में स्थित है।

इस युद्ध में हार के बाद महादजी सिंधिया ने कहा यदि में जीवित रहा तो जयपुर को धूल में मिला दूंगा।

पाटन का युद्ध –

यह युद्ध 20 जून 1740 में आमेर एवं मराठा सेना के मध्य हुआ जिसमें मराठा सेना विजयी हुई।

→ मराठा सेनापति डिबोई शहीद हो गए जिनकी कब्र मेड़ता नागौर में स्थित है।

→ राजस्थान की बीकानेर एवं जैसलमेर रियासत ऐसी रियासतें हैं जिन पर मराठों ने कभी आक्रमण नहीं किया बीकानेर, जैसलमेर और किशनगढ़ रियासत ने कभी भी मराठाओं को खैरात (टैक्स) नहीं दी।

कुछ और जानकारी

→ राजस्थान में पहली बार अंग्रेजों द्वारा हस्तक्षेप 1781 में जोधपुर महाराजा विजय सिंह के कहने पर किया।

→ भारत में पहली सहायक संधि अंग्रेज एवं हैदराबाद के निजाम के साथ हुई।

→ राजस्थान में सर्वप्रथम सहायक संधि अंग्रेज और भरतपुर रियासत के रणजीत सिंह के मध्य 19 सितंबर 1803 में हुई।

→ पहली रक्षात्मक एवं आक्रात्मक संधि अंग्रेजी एवं अलवर रियासत के मध्य हुई।

→ जोधपुर रियासत ने 29 दिसंबर 1803 को अंग्रेजी से संधि की जो किसी कारण बस असफल रही।

→ यह संधि उन्हें 6 जनवरी 1818 को जोधपुर के राजा मानसिंह के द्वारा संपन्न हुई।

→ अंग्रेज में मराठों के मध्य प्रथम युद्ध 1803 में लासवाड़ी (मेवाड़) में हुआ जिसमें अंग्रेजी सेना विजय हुई।

Conclusion :

दोस्तों अगर आपको हमारी यह जानकारी अच्छी लगे तो हमें नीचे कमेंट करें और इसी तरह हम आपके लिए नई-नई और जानकारी लेकर आते रहेंगे और इसे अपने दोस्तों के साथ शेयर करें ताकि वह भी इसके बारे में जानकारी प्राप्त कर सके तब तक के लिए आप हमारे साथ बने रहिए। धन्यवाद।

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